Tuesday, June 11, 2019

Generalized system of preferences

Generalized System Of Preferences
यह एक अमेरिकी  व्यापारी नीति है जिसके तहत यूएसए विकासशील देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने देश में बिना शुल्क वस्तुओं का आयात करता है । प्रारंभ में यह नीति अफ्रीकी महाद्वीप के देशों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, धीरे-धीरे इसका लाभ अन्य विकासशील देशों तक विस्तारित किया गया।अमेरिका ने 129 देशों को यह सुविधा दी है जहां से लगभग 5000 वस्तुओं (प्रोडक्ट) का आयात होता है ।यूएसए ने ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 1 जनवरी 1976 को जीएसपी का गठन किया था। इसके तहत अगर कोई विकासशील देश (mfn नही है तो भी)अमेरिकी कांग्रेस द्वारा तय शर्तों को पूरा करता है तो वह वाहन ,कल पुर्जों, कपड़ों आदि से जुड़ी सामग्री सहित करीब 2000 उत्पादों को यूएसए को बिना किसी शुल्क के निर्यात कर सकता है। यूएसए ने नवंबर 2018 से ही 50 भारतीय उत्पादों पर जीएसपी वापस ले लिया था। भारत-अमेरिका व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार ,विश्व व्यापार का लगभग 2% है लेकिन 2005 से 2017 के मध्य यह मूल्य में दोगुना होकर 126 बिलियन तक पहुंच गया है। जीएसपी के तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर यानी करीब ₹40000 करोड़ के एक्सपोर्ट का फायदा होता था तथा आयात शुल्क से छूट मिलती थी ।जीएसपी से बाहर होने पर यह फायदा नहीं मिलेगा ।हैंडलूम व कृषि से जुड़े उत्पादों को नुकसान होने की संभावनाएं हैं। दरअसल ,'अमेरिका प्रथम' नीति के तहत यूएसए अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगा हुआ है ,साथ ही साथ विकासशील देश के रूप में चीन का आर्थिक एवं सामरिक महाशक्ति के रूप में उभरना अमेरिका को चिंतित करता है और वह कहीं ना कहीं विकासशील देशों को उभरते हुए देखना नहीं चाहता। वह उतना ही उभरने देना चाहता है जिससे उसके व्यापारिक एवं सामरिक हित सध सकें। जहां तक रही भारत की बात तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि भारत में हमारे कुछ उत्पादों पर 100% से अधिक आयात शुल्क लगाया जाता है। उन्होंने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल के शुल्क की चर्चा भी की थी और कहा था कि इस पर लगने वाले आयात शुल्क को कम किया जाए जिससे हमारी मोटरसाइकिल अधिक से अधिक बिक सकें। दुनिया में अमेरिका- चाइना ट्रेड वार भी चल रहा है चूँकि चाइना वन बेल्ट वन रोड(OBOR)  बनाने का प्रयास कर रहा है जिसके माध्यम से वह अपने आर्थिक एवं सामरिक हितों को साध रहा है ।चीन स्थल मार्ग तथा जलमार्ग दोनों के माध्यम से अपना पैर पसार रहा है। अमेरिका की चिंता जायज भी है क्योंकि अमेरिकी जीडीपी दुनिया की सबसे बड़ी जीडीपी है उसके बाद चीन का ही नंबर आता है ।चीन विज्ञान तकनीक एवं अंतरिक्ष  क्षेत्र में काफी आगे हो चुका है ।भारत भी धीरे-धीरे करके विकासशील देशों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है तो आने वाले समय में अमेरिका ,भारत के ऊपर अन्य प्रकार की आर्थिक समस्याएं थोप सकता है ।सामरिक क्षेत्र में  काटसा (CAATSA, countering America's  adversaries through sanctions act ) के माध्यम से भारत के रूस जैसे अन्य सामरिक साथियों रक्षा व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रहा है । अमेरिका चाहता है की भारत रक्षा क्षेत्र के उत्पाद अमेरिका से ही खरीदें और उसकी लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियां पुष्पित एवं पल्लवित होती रहे बदले में थोड़ी-थोड़ी व्यापार सुविधाएं व भारत को देने पर विचार कर रहा है । अमेरिकी व्यापारिक नीति की वजह से ही आज ईरान से हमारे कच्चे तेल का आयात प्रभावित हुआ है जिसकी वजह से भारत में तेल के दाम बढ़ सकते हैं जिससे महंगाई में भी उछाल आ सकता है और भारतीय जनता को कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
आशुतोष एस मन्नू
अ.प्रोफेसर

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